राजस्थान में घरेलू गैस सिलेंडर लेना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। 26 मार्च 2026 से राज्य सरकार ने एक सख्त नियम लागू कर दिया है बिना OTP और डायरी एंट्री के कोई भी एलपीजी सिलेंडर डिलीवर नहीं होगा। कालाबाजारी और अनुचित वितरण पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया यह कदम गैस वितरण तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
OTP प्रणाली बुकिंग से डिलीवरी तक कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था सीधी है। जैसे ही उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक करेगा, उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। डिलीवरी बॉय सिलेंडर तभी सौंपेगा जब उपभोक्ता वह OTP दिखाएगा। बिना OTP के डिलीवरी से इनकार किया जा सकता है। फर्जी बुकिंग या धोखाधड़ी की स्थिति में सीधी कार्रवाई होगी। इसके लिए उपभोक्ता को अपना मोबाइल नंबर पहले से गैस एजेंसी में रजिस्टर कराना होगा।
डायरी एंट्री दोहरी सुरक्षा का कवच
सिर्फ OTP काफी नहीं। हर डिलीवरी पर डायरी एंट्री भी अनिवार्य है। डिलीवरी बॉय ग्राहक का नाम, पता और OTP की जानकारी रजिस्टर में दर्ज करेगा। यह डिजिटल और लिखित दोनों स्तरों पर रिकॉर्ड बनाएगा। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में रिकॉर्ड खंगालकर दोषी की पहचान तुरंत हो सकेगी। यह दोहरी व्यवस्था जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
सब्सिडी चोरी पर लगेगी लगाम
घरेलू एलपीजी सिलेंडर सरकारी सब्सिडी पर मिलता है और इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है। बावजूद इसके, कई होटल, ढाबे और छोटे व्यवसाय इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे सरकार को करोड़ों की सब्सिडी का नुकसान होता है और आम उपभोक्ता सिलेंडर से वंचित रह जाता है। OTP व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि सिलेंडर सिर्फ सही उपभोक्ता तक पहुंचे।
ग्रामीण इलाकों की चुनौतियाँ और उनके संभावित हल
राजस्थान के दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या एक वास्तविक चुनौती है। OTP समय पर न मिले तो उपभोक्ता परेशान हो सकते हैं। बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए स्मार्टफोन चलाना मुश्किल हो सकता है। इसके समाधान के रूप में परिवार के किसी अन्य सदस्य का नंबर रजिस्टर कराने की सुविधा दी जा सकती है। नेटवर्क न होने पर आधार कार्ड जैसे वैकल्पिक पहचान प्रमाण से डिलीवरी का विकल्प भी रखा जा सकता है। अधिकांश उपभोक्ताओं ने इस बदलाव का स्वागत किया है। नागरिक संगठन और उपभोक्ता फोरम भी इसे सकारात्मक मानते हैं और अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने का सुझाव दे रहे हैं। यदि यह नीति सफल रही, तो देशभर में LPG वितरण तंत्र सुधारने की दिशा में यह एक निर्णायक मॉडल बन सकती है।